4 अक्टूबर 2024 - 14:45
आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने ज़ायोनी और वेस्टर्न प्रोपैगंडे की धज्जियाँ उड़ाई

घायल व लहूलुहान लेबनान का क़र्ज़ अदा करना हमारा और सभी मुसलमानों का फ़रीज़ा है। ज़ायोनी सरकार पर पड़ने वाला हर वार चाहे वह किसी भी शख़्स या संगठन की ओर से हो, न सिर्फ़ इलाक़े बल्कि पूरी इंसानियत की सेवा है।

हिज़्बुल्लाह लेबनान के सुप्रीम सय्यद हसन नसरुल्लाह की शहादत के बाद पश्चिमी मीडिया की ओर से चलाये जा रहे नैरेटिव की हवा निकालते हुए ईरान की इस्लामी क्रांति के सुप्रीम लीडर हज़रत आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने तेहरान में ऐतिहासिक नमाज़े जुमा की इमामत की।

आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने इस ऐतिहासिक जुमे के ख़ुत्बे में कई अहम् बातों का ज़िक्र किया जिसके कुछ अहम् पॉइंट्स निम्न लिखित है। 

मैंने ज़रूरी समझा कि मेरे भाई, मेरे अज़ीज़, गौरवान्वित करने वाले, इस्लामी जगत की लोकप्रिय हस्ती, इलाक़े की क़ौमों की ज़बान, लेबनान के अनमोल रत्न जनाब सय्यद हसन नसरुल्लाह को श्रद्धांजलि पेश करने का प्रोग्राम तेहरान की जुमे की नमाज़ में आयोजित हो। बेशक सय्यद हसन नसरुल्लाह का जिस्म हमारे बीच नहीं रहा लेकिन उनकी दूर तक पहुंचने वाली आवाज़ हमारे बीच यथावत बाक़ी रहेगी। वो ज़ालिम और लुटेरे शैतानों के मुक़ाबले में प्रतिरोध का ऊंचा परचम थे। मज़लूमों की बोलती ज़बान और बहादुर रक्षक थे। 

सय्यद हसन नसरुल्लाह मुजाहिदों और सत्य की राह पर चलने वालों का साहस और हौसला थे। उनकी लोकप्रियता और गहरे प्रभाव का दायरा लेबनान, ईरान और अरब मुल्कों की सरहदों से आगे तक फैला हुआ था और अब उनकी इस शहादत से उनका प्रभाव और बढ़ जाएगा। 

अपनी दुनियावी ज़िंदगी में हसन नसरुल्लाह का लेबनानी क़ौम के लिए पैग़ाम था कि इमाम मूसा सद्र, और अब्बास मूसवी जैसी हस्तियों के चले जाने की स्थिति में आप मायूस न हों, अपनी ताक़त बढ़ाइये, आक्रामक दुश्मन के मुक़ाबले में प्रतिरोध कीजिए और उसे शिकस्त दीजिए। 

मेरे अज़ीज़ो! लेबनान की वफ़ादार क़ौम! हिज़्बुल्लाह और अमल के जवानो! मेरे बच्चों! आज भी अपनी क़ौम, रेज़िस्टेंस फ़्रंट और इस्लामी जगत से हमारे शहीद सय्यद की यही इच्छा है। घटिया दुश्मन जब हिज़्बुल्लाह या हमास या इस्लामी जेहाद के मज़बूत ढांचे को कोई बड़ा नुक़सान नहीं पहुंचा पा रहा है तो टार्गेट किलिंग और निहत्थे लोगों का क़त्लेआम करके उसे अपनी कामयाबी ज़ाहिर कर रहा है। 

अज़ीज़ो! दुखी दिलों को अल्लाह के ज़िक्र और उससे मदद तलब करने के ज़रिए सुकून मिलेगा, विरानियां दूर होंगी और आपके धैर्य व दृढ़ता से सम्मान व प्रतिष्ठा में इज़ाफ़ा होगा।  हसन नसरुल्लाह की सूझबूझ भरी कोशिशों से हिज़्बुल्लाह ने चरणबद्ध रूप में, सब्र

 व धैर्य से, तार्किक और स्वाभाविक अंदाज़ में विकास का अमल तय किया और विभिन्न अवसरों पर ज़ायोनी सरकार को पीछे ढकेल कर दुश्मन को अपनी मौजूदगी का एहसास कराया। हिज़्बुल्लाह वाक़ई पाकीज़ा दरख़्त है। हिज़्बुल्लाह और उसके बहादुर व शहीद रहनुमा, लेबनान की पहचान और इतिहास की ख़ासियतों का निचोड़ हैं।

 घायल व लहूलुहान लेबनान का क़र्ज़ अदा करना हमारा और सभी मुसलमानों का फ़रीज़ा है। ज़ायोनी सरकार पर पड़ने वाला हर वार चाहे वह किसी भी शख़्स या संगठन की ओर से हो, न सिर्फ़ इलाक़े बल्कि पूरी इंसानियत की सेवा है। 

ज़ायोनी सरकार जाली और अस्थिर है।

 ज़ायोनी सरकार ने अमेरिका की मदद से बमुश्किल अपना वजूद बचा रखा है। 

एक साल से दुश्मन ग़ज़्ज़ा और लेबनान में अरबों डालर ख़र्च करने के बाद अमेरिका और कई पश्चिमी सरकारों की मदद के बावजूद मैदाने जंग के कुछ हज़ार सिपाहियों से, जो घिरे हुए भी हैं और बाहर से उनकी हर मदद रोक दी गयी है, शिकस्त खा गयी, उसकी एक ही कामयाबी, निहत्थे लोगों का क़त्ले आम है।